एसआईपी (सिप) क्या है - पूरा रूप, अर्थ, निवेश के लाभ, प्रकार, और कैसे करें
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सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) एक वित्तीय योजना है जो निवेशकों को सावधानीपूर्ण और सूचित तरीके से निवेश करने का एक मौका प्रदान करती है। आप इसमे एक छोटी रकम को नियमित अंतराल के लिए निवेश कर सकते हैं, जिससे आपको आपके वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती हैं। SIP के माध्यम से निवेश करने से आपको बाज़ार की अस्थिरता या उतार-चढ़ाव से बचने का मौका मिलता है, क्योंकि वह नियमित निवेश में बदलते बाज़ार की स्थिति से निरंतर बदलती रहती है। इससे आपकी वित्तीय स्थिति में स्थिरता बनी रहती है और संवेदनशीलता की दिशा में मदद मिलती है।

म्यूचुअल फंड में एसआईपी क्या है ? (Mutual Fund Me Sip Kya hai)

SIP म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक प्रकार है जिसमें व्यक्ति एक निश्चित फंड योजना का चयन करता है और समय-समय पर छोटी राशि में निवेश करता है। इस प्रणाली की विशेषता यहाँ पर है कि यह वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए नियमित रूप से निवेश करने की स्वीकृति देती है, जिससे उच्च रिटर्न की संभावना बनी रहती है। म्यूचुअल फंड निवेश का एक बेहद सरल तरीका है। आप इसमे नियमित अंतराल पर निवेश करके अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं ।

एसआईपी कैसे काम करता है ? (SIP Kaise kam karta hai)

SIP एक तरीका है जिससे आप म्युचूअल फंड में नियमित रूप से कम धन राशि के साथ भी निवेश कर सकते हैं। इसका मतलब होता है सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। यह उन निवेशकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जिनकी आय कम हो या जो नियमित रूप से निवेश करना चाहते हैं।

इस प्रक्रिया में, पहले आप अपने पसंदीदा म्यूचुअल फंड का चयन करते हैं। फिर आप अपने निवेश के लिए निवेश करने की राशि और निवेश के अंतराल का चयन करते हैं। आपके द्वारा चुने गए समय पर आपके द्वारा तय की गई राशि आपके खाते से काट ली जाएगी और स्वचालित रूप से फंड में निवेश कर दी जाएगी।

इसकी मदद से आप मात्र 500 रुपए से भी म्युचूअल फंड में निवेश कर सकते हैं, इसीलिए पिछले कुछ समय से इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी है और बहुत लोग इसे करने लगे हैं।

एसआईपी  के फायदे (Benefits of SIP in Hindi)

वैसे तो एसआईपी में निवेश करके आप अपने लिए बचत और ग्रोथ दोनों ही करते हैं परंतु इसके अलावा भी एसआईपी करना बहुत फ़ायदेमंद होता है। इसके लाभ नीचे दिए गए हैं:

  1. SIP में निवेश करके आप कम्पाउन्डिंग का लाभ उठा सकते हैं। जितने ज़्यादा समय तक आप निवेश करते हैं, उतना ही आपको रिटर्न भी मिलता है। 
  2. यह आपको निवेश में फ़्लेक्सिबिलिटी प्रदान करता है। अगर आप एसआईपी करते हैं और आपकी चलती एसआईपी के दौरान बाज़ार में कोई गिरावट आए तो आप तुरंत इसको रोक सकते हैं या बंद कर सकते हैं।
  3. एसआईपी करके आप आयकर पर छूट प्राप्त कर सकते हैं।
  4. इसमें आप निवेश का अंतराल अपनी सहूलियत के अनुसार चुन सकते हैं जैसे आप सालाना निवेश करना चाहते हैं या हर महीने।
  5. आप एसआईपी करने के लिए अपने पेमेंट्स को ऑटोमेट भी कर सकते हैं जिससे पैसे हर महीने अपने आप आपके बैंक से निवेश हो जाते हैं। इससे आपका समय भी बचत है।
  6. SIP के माध्यम से निवेश करके आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सकते हैं।
  7. SIP वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक योग्य और सबसे सुविधाजनक तरीका है।
  8. सिस्टमेटिक निवेश के द्वारा, आप अपने बजट के अनुसार निवेश कर सकते हैं और अपनी वित्तीय स्थिति को सुधार सकते हैं।

एसआईपी के लिए डॉक्युमेंट्स (Documents for SIP in Hindi)

एसआईपी (Systematic Investment Plan) शुरू करते समय, आपके पास निम्नलिखित महत्वपूर्ण दस्तावेज़ होने चाहिए:

  1. पैन कार्ड
  2. आधार कार्ड
  3. बैंक खाता डिटेल्स
  4. फ़ॉर्म 16 या सैलरी स्लिप
  5. फ़ॉर्म 26AS
  6. बैंक डिटेल्स
  7. फ़ॉर्म 80C/80D की प्रमाणित प्रतियाँ

एसआईपी (SIP) में निवेश क्यों करना चाहिए ??

आपको एसआईपी में निवेश अवश्य करना चाहिए क्यूंकि इसकी मदद से आप को बचत और नियमित निवेश की आदत पढ़ जाती है और आपको वित्तीय तौर पर सुरक्षा मिलती है। जब आप हर महीने थोड़े थोड़े करके निवेश करते हैँ तो कम्पाउन्डिंग के कारण आप एक अच्छी राशि जमा कर लेते हैं जिससे आप अपने किसी वित्तीय लक्ष्य जैसे घर खरीदना, आसानी से पूरा कर सकते हैं। साथ में आप रिटायरमेंट के बाद के लिए भी पैसे जोड़ पाते हैं।

एसआईपी में क्योंकि आप एक साथ ज़्यादा पैसे न डालकर छोटी छोटी किश्तों में निवेश कर पाते हैं तो इससे आपकी जेब पर बोझ नहीं पड़ता, इन सब कारणों कि वजह से आपको एसआईपी में ज़रूर निवेश करना चाहिए।

यह भी पढ़ें :  5 वर्षों के लिए शीर्ष एसआईपी योजनाएं

एसआईपी निवेश कैसे शुरू करें? (SIP me Invest Kaise Kare in Hindi)

एसआईपी शुरू करने के लिए सबसे पहले आपको अपना लक्ष्य निर्धारित करना होगा। जब आपको उद्देश्य पता हो तो आप अच्छी तरह से मूल्यांकन कर सकते हैं कि आपको हर महीने कितनी राशि निवेश करने की आवश्यकता है। उसके बाद, सुनिश्चित करें कि आप निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं का पालन करें:

  • अपने दस्तावेज़ तैयार रखें
  • केवाईसी पूरा करें
  • एसआईपी के लिए पंजीकरण करें
  • सही योजना का चयन करें
  • निवेश राशि तय करें
  • SIP की तारीख चुनें
  • फ़ॉर्म जमा करें

 

एसआईपी में निवेश करने के लिए आप नीचे दिए स्टेप्स का पालन कर सकते हैं:

  1. पहले अपने लिए सही म्युचूअल फंड का चयन करें जिसके लिए बेहतर होगा आप थोड़ी रिसर्च करें।
  2. आपको म्युचूअल फंड निवेश के लिए अकाउंट खोलना होगा जो कि आप कोटक महिंद्रा बैंक के साथ ऑनलाइन भी खोल सकते हैं। कोटक की वेबसाइट या ऐप से आवेदन करना आसान प्रक्रिया है।
  3. ऑनलाइन आवेदन फ़ॉर्म में अपनी जानकारी भरें और ज़रूरी दसतावेज़ अपलोड करें, फिर आपकी डिटेल्स और दस्तावेज़ वेरिफ़ाई होने के बाद आपका अकाउंट खुल जाएगा।
  4. उसमें आपने जो फंड चुना है उसकी SIP आप, प्लान की राशि, और समय चुनने के बाद ऑटोमैटिक पेमेंट सेट करके कर सकते हैं और फिर हर महीने आपके अकाउंट से निवेश होता रहेगा।

निवेश करने के बाद आपको अपने SIP की ग्रोथ को हमेशा ट्रैक करते रहना चाहिए।

एसआईपी   के प्रकार ( वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर )

आप अपने वित्तीय लक्ष्यों और आवश्यकताओं के हिसाब से SIP के निम्नलिखित प्रकारों में से किसी भी प्रकार की SIP का चयन कर सकते हैं:

  1. मासिक SIP: इसमें आप मासिक यानी हर महीने में निवेश कर सकते हैं।
  2. तिमाही SIP: इसमें आप हर तीन महीने के अंतराल पर निवेश कर सकते हैं।
  3. चयनित तिमाही SIP: इसमें आप अपनी पसंदीदा तिमाही पर निवेश कर सकते हैं।
  4. वार्षिक SIP: इसमें आप हर वर्ष में एक बार निवेश कर सकते हैं।

एसआईपी  के प्रकार (Types of SIP in Hindi)

एसआईपी के प्रकार समझकर आप अपने लिए सही एसआईपी आसानी से थोड़ी रिसर्च करके चुन सकते हैं। इसके 7 प्रकार होते हैं:

  1. रेगुलर एसआईपी: इसमें आप एक नियमित एसआईपी में निवेश राशि और फ्रिक्वेंसी सेट कर सकते हैं। इसमें आप फिक्स्ड राशि निवेश करते हैं और नियमित अवधि में स्वचालित रूप से वह चलती है।
  2. फ्लेक्सिबल एसआईपी: इसमें आप अपनी वित्तीय परिस्थिति और बाज़ार की स्थिति के अनुसार निवेश राशि बदल सकते हैं। इसको फ्लेक्स एसआईपी या फ्लेक्सी एसआईपी भी कहा जाता है।
  3. टॉप - अप एसआईपी: SIP का यह प्रकार आपको अधिक निवेश की अनुमति देता है। आपके करेंट प्लान के दौरान ही, जब आपके पास निवेश के लिए अधिक पैसा उपलब्ध हो, तो आप अपनी निवेश राशि बढ़ा सकते हैं।
  4. स्टेप - अप एसआईपी: आप इसमें पूर्व निर्धारित अंतराल पर एसआईपी का उपयोग करके एसआईपी राशि बढ़ा सकते हैं।
  5. ट्रिगर एसआईपी: ट्रिगर एसआईपी में निवेश तभी होता है जब कोई विशेष घटना होती है। यह विशेष घटना एक सकारात्मक बाज़ार प्रवृत्ति या लक्षित एनएवी लेवल भी हो सकता है।
  6. परपेचुअल एसआईपी: जब भी आप sip करते हैं तो उसमें शुरुआत की डेट तो डाल देते हैं पर वो खत्म कब होगी आप में से ज़्यादातर लोग यह नहीं डालते। तो जिस भी एसआईपी में खत्म होने की डेट नहीं होती वो परपेचुअल एसआईपी बन जाती है।
  7. मल्टी एसआईपी: आप इसमें केवल एक एसआईपी से ही विभिन्न फंड हाउस योजनाओं में निवेश करने का लाभ उठा सकते है।
  8. बीमा के साथ एसआईपी: इसमें इंश्योरेंस और एसआईपी के फ़ायदे एक साथ आपको मिल सकते हैं। आपका पैसा म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है, फंड हाउस आपको उस पर जीवन बीमा पॉलिसी प्रदान करता है। यदि निवेश अवधि के दौरान निवेशक की अप्रत्याशित रूप से मृत्यु हो जाती है, तो यह बीमा पॉलिसी उनके नॉमिनी को मिल जाती है।

रेगुलर प्लान में कैसे करें निवेश ?

रेगुलर प्लान में निवेश करने के लिए आप निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:

  1. म्यूचुअल फंड का चयन : पहला कदम है वह म्यूचुअल फंड चुनना जिसमें आप निवेश करना चाहते हैं। आप यह चयन आपके वित्तीय लक्ष्यों, रिस्क टॉलरेंस, और निवेश की अवधि के आधार पर करें।
  2. ब्रोकर का चयन करें : अगला कदम है एक ब्रोकर का चयन करना, जिसके माध्यम से आप म्यूचुअल फंड्स में निवेश करेंगे। यह ब्रोकर आपके निवेश को मैनेज करेगा।
  3. निवेशक रूप में रजिस्ट्रेशन: आपको ब्रोकर के साथ एक निवेशक के रूप में रजिस्टर करना होगा, जिसके लिए आपको कुछ विवरण, जैसे कि पहचान, पता, बैंक खाता डिटेल्स, और अन्य आवश्यक जानकारी प्रदान करनी होंगी।
  4. निवेश रकम का निर्धारण करें : अब, आपको यह तय करना होगा कि आप कितनी राशि का निवेश करना चाहते हैं। फिर आप इसमें निवेश करके आप अपनी सुरक्षित वित्तीय यात्रा शुरू कर सकते है।

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